Monday, July 25, 2011

बिदाई

मौत भी हसीन होती है दोस्त
इसे हंसकर गले लगाने दो
दुआ मत मांगों खुदा से दो -चार दिनों के लिए
शर्मिंदा होना पड़ेगा मुझे उसके दरवार में

जा रही हूँ जहाँ से आई थी
शुक्रिया आपका जो अपनी ज़िन्दगी में जगहे दी
ले जा रही हूँ आपके प्यार की सौगात बिदाई में

एक मुराद पूरी कर देना
एक गुलाब का पौथा लगा देना
ग़म सताये जो मेरे जाने का कभी
खिले गुलाब में मेरा चेहरा देख लेना

मातम मत मनाना मेरे जाने का कभी
तोहीन होगी मेरी और मेरे खुदा की !

Thursday, July 14, 2011

अपना अपना खुदा

जितने इंसान हैं यहाँ उतने ही खुदा हैं !
हर किसी ने अपना खुदा बना रखा है !
मिलती नहीं है सूरत तेरे खुदा की मेरा खुदा से !
बिना सूरत देखे तमाशा लगा रखा है !

जिसने देखी है उसकी एक झलक भी !
वो हर मज़हब से बेखबर हो गया !
जो रह गए है महरूम उसकी इनायत से !
उन्ही ने उसके नाम पे बबाल मचा रखा है !

Wednesday, July 13, 2011

इल्तज़ा

तेरे पास रहूँ या दूर कहीं !
कभी दुश्मन बनके, तुझे चोट न करू !

अगर मिले तू कभी अजनबी बनकर भी ,
मेरी पलकें शर्म से न झुकें !
इतनी पाक मुहब्बत रहे मेरी !

जो याद आये कभी तेरी, डबडबा जाए आँखें मेरी !
ख्वाब में भी, शिकायत न करू ज़माने से तेरी !
उस उंचाई तक लेकर जाय मुहब्बत तेरी !

तेरा होना न होना, किस्मत की बात है !
तेरे न होने से, कभी गवाऊं न खुद को मैं !

इतनी सी खुदा से इल्तज़ा है मेरी !

Friday, July 1, 2011

पर...

हाय रे ...व्यथा मेरी
आगे बढ़ रही हूँ
या फिसलकर नीचे गिर रही हूँ
ये भी जान नहीं पाती हूँ

पर ,
कुछ बदलता जा रहा है
कुछ हाथों से छूटता जा रहा है
घनघोर बादलों सा मेरा मन,
नदी जैसा शीतल होता जा रहा है

दुश्मनों की फ़िक्र नहीं,
दोस्तों से भी दूरी बनती जा रही है
हंसी तो पहले ही बेकाबू थी
अब आंसुओं से भी लगाब हो गया है
जाने अपने करीबियों को,
ये गहराई कैसे दिखा पाऊँगी !

पर,
जो भी साथ चला मेरे
न रहेगा उसका कोई अतीत
न आयेगा उसका कोई कल
शब्दों की झंझट छूट जायेगी
रहेगा शेष,
जो कहा न जा सके

नदी में कूद तो गई हूँ
न आये तैरना मुझे
कोई भी भंबर तबाह कर सकता है
पल में , मेरा अस्तित्व मिटा सकता है

पर ,
नदी को ही मेरी हिम्मत पर तरस आ गया है
वो उतना ही डूबने देती है
जितने में मेरी सांसे चलती रहे !

और तमाशा क्या खूब है
मैंने उसकी तली में भी जाकर साँस लेना सीख लिया

Thursday, June 30, 2011

फिर चला है दिल अकेला...

फिर चला है दिल अकेला ,
अपनी मंजिलों की तलाश में !
जाने किससे मुलाकात हो,
उस अजनबी शहर में !

होगें रस्ते अनदेखे से,
होगी गलियां गुमनाम सी !
न होगा कोई दुआ सलाम करने वाला !
फिर चला है दिल अकेला ,
कुछ नए दोस्ताने बनाने !

सड़के देखती होंगी राह मेरी
देती होंगी आवाज हवाएं वहां की !
मैं ही नहीं हूँ बेचैन उनके मिलन को !
उन्हें भी इंतज़ार रहता होगा मेरा !
फिर चला है दिल अकेला ,
उनके फ़साने सुनने और अपने कहने !

हर सफ़र में,
कुछ देकर आ जाती हूँ
कुछ लेकर आ जाती हूँ
न मैं मैं रहती हूँ
न वो शहर वो रहता है
फिर चला है दिल अकेला ,
थोड़ा सा लेने थोड़ा सा बाटने !

न जाने कितनी चट्टानों पर अपने निशा छोड़े हैं
न जाने कितने समन्दरों के रेत में खारोंदे बनाये हैं
न जाने कितने दरख्तों से दोस्ती की है
न जाने कितनी नदियों का संगीत सुना है
सबने बिना जाने बेसुमार प्यार किया है !
फिर चला है दिल अकेला ,
उनके उसी प्यार को पाने !

मन मेरे ...

मन मेरे ...
क्यों है तू बाबरा ,
जो मिलता है वो तुझे नहीं भाता
जो नहीं मिलता,
उसे पाना मकसद जो जाता तेरा !

ये भी कोई बात है भला,
तू रहे हमेशा सब पाकर भी प्यासा !
करू कितने भी जतन ,
तेरा प्याला खाली ही रह जाता !

हद है दोस्त तेरी,
नींद में भी तू भटकता रहता है
सपनों में,
कभी अतीत को कुरेदता है
कभी भविष्य के सपने बुनता है

क्या करू तेरा , तू ही बता दे !
न दोस्ती भली तुझसे,
न दुश्मनी से कुछ हासिल !
कोई बीच का मार्ग हो, तो समझा दे !

सच ये है ,
तू मुझसे, मैं तुझसे जुदा हो नहीं सकते!
तो ऐसा करते हैं ,
ज़रा-सा फासला दरमियां बना लेते हैं

मैं दूर से तुझे निहारती रहूँ !
न तेरी कुछ सुनु, न अपनी कुछ कहू ,

बता बाबरे मन कैसी रहेगी !

Friday, June 24, 2011

जोगन

जोगन बन गई हूँ तेरे इश्क में,
अब कुछ और मुझे भाय नहीं !
करू जाके फरियाद किससे,
फरियाद सुनने वाले से लगन लगी !

लोग पुकारे मुझे बाबली,
हूँ बिन बात खिलखिलाती रहती !
बेहोश होती तो होश में आ भी जाती,
क्या करू जब होश में बेहोशी रमने लगी !

लगा था दुनिया के काम काज में,
भूल जाऊगी नमाज़ पड़ना !
देख दुनिया का तमाशा,
नमाज़ पड़ने के सिवा सब बेमतलब लगा !

हर जन्म कंकड़ पथरों को ही बटोरा है ,
इस बार अपने इश्क में मुझे दीवाना बनने दे !
तुझे इज़ाज़त है हर दर्द देने की मुझे,
बस अपने और पास मुझे खुदा खींचता जाना !

जोगन बन गई हूँ तेरे इश्क में,
अब कुछ और मुझे भाय नहीं !
करू जाके फरियाद किससे,
फरियाद सुनने वाले से लगन लगी !