तुझसे मुलाकात के बाद ये मेरा हाल है
या फिर इस हाल में तुझसे मुलाकात हो गई
संगीत के तार बजते हैं हर पल कहीं
जैसे अमृत बरस रहा हो हर तरफ से
इतनी मस्ती छाई है कि पता नहीं क्या करूँ
सब कुछ जैसे नया जन्म ले रहा हो
आँखों में एक नई रोशनी है
हवा में कहाँ से इतनी खुशबू आ गई है
मन कहता है
बाँध के घुँघरू बस नाचती रहूँ
सारे गली-मुहल्ले में शोर मचाऊँ
अंग अंग में रंग भर गया प्रेम का
इस प्रेम को लेकर अब जाऊँ कहाँ
होंठों पर बिखरी रहती है हंसी
सब पूछते है मुझसे इस मस्ती का राज़
क्या मिल गया है तुझे?
जो खिली है रात में सुबहे की पहली किरण जैसी
थक नहीं जाती नाचते-नाचते
क्या कहूँ मैं उनसे
ऐसा रंग चढ़ा है उतरने का नाम ही नहीं लेता
-- Wed, २० जून २००७
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