Thursday, October 24, 2013

Suffering

Suffering is needed  for human growth like  a tree needs wind,rain, and sun for its growth. Suffering, Problems and Pain everything is given in life to sharpen our intelligence and to awake us otherwise we never bother about essential things in life. When some deadly disease knocks our door or somebody dear to us die, then immediately our perspective towards life changes within moments.
I am not saying we should invite suffering. I am saying when suffering enters in our life. Hold its hand and with love, ask what's the purpose of its Visit :-). It always brings some message and learning. A person who has never faced any problem is so weak that he will not have spine to stand his own but a person who faced the problems and suffered but converted his suffering into challenge and creativity. There will not be any fear in her eyes because s(he) knows her hidden capabilities to transform any problems into a learning.

Saturday, August 24, 2013

स्वीकार नहीं कर पाई

मैं कहना तो सीख गई,
जो भी तू करता है, अच्छे के लिए करता है !
पर स्वीकार नहीं कर पाई
पड़ी रहती है कहीं अंतर्मन में,
शक की एक छोटी-सी डली !

एक स्वस्थ काया दी,
ख़ूबसूरती निहारने के लिए दो नैन दिए
संगीत का मजा लूटने के लिए दो कान दिए
धिरकने के लिए दो पैर भी दिए

नहीं देता, तो क्या तेरा बिगाड़ लेती !
कहने को तो बहुत दिया,
फिर भी, मुझे हमेशा कम लगा !

एक माँ दी, प्यार से पालने के लिए !
एक पिता दिया , शिक्षा की देख -भाल के लिए !
एक छत मिली बारिश में,
घी रोटी मिली भूख में !

ना  होता साया किसीका,
तो कैसे नाजुक बचपन को संभालती !
कहने को तो बहुत दिया,
फिर भी, मुझे हमेशा कम लगा !

जब गिरी लड़खड़ाकर  मैं ,
तूने किसी बहाने से मुझे धाम लिया !
कभी दे दिया वो, जिसकी मुझे चाहत थी
कभी जुदा कर दिया उसे, जो आज़ीज़ था

ना करता जुदा किसीको मुझसे,
तो आज मैं अपने प्यार के साथ कैसे होती
कहने को तो बहुत दिया तूने,
फिर भी, मुझे हमेशा कम लगा !

मैं कहना तो सीख गई,
जो भी तू करता है, अच्छे के लिए करता है !
पर स्वीकार नहीं कर पाई !
पड़ी रहती है कहीं अंतर्मन में,
शक की एक छोटी-सी डली !

I am still waiting the day I will have total acceptance and trust in existence...

प्यार

चल दोस्त...
आज प्यार बाँटते हैं

प्यार से बोलते हैं
प्यार से सुनते हैं
प्यार से देखते हैं

जो कह दे कोई बुरा-भला,
उसे गले लाककर,
उसका दर्द थोड़ा कम कर देते हैं

चल ना दोस्त..
एक दिन के लिए ही सही
प्यार बांटके देखते हैं

Thursday, August 22, 2013

क्या इसे मोहब्बत कहेंगे ?

सब शोर लगता है,
तेरी आवाज के सिवा
क्या इसे मोहब्बत कहेंगे ?

कितना चाहती हूँ
तुझसे दूर जाना !
पर कैसे खींच लेता है तू ,
बिना आवाज दिए !
क्या इसे मोहब्बत कहेंगे ?

कभी कभी गुस्सा आता है,
अच्छा ख़ासा संसार था मेरा,
तूने उजाड़ के जंगल कर दिया !
जंगल का सरसराता अकेलापन,
डराता भी है,  भाता भी है !
क्या इसे मोहब्बत कहेंगे ?

रात का अँधेरा, अब काटता नहीं है
दुःख का घना बादल, अब सताता नहीं है

कह जाती है आंखें तेरी कुछ ऐसा ,
बस दिल ही समझ पाता है !
मैं बेजुवां हो जाती हूँ !
क्या इसे मोहब्बत कहेंगे ?

Translation for my dear Husband :-)

Everything is just noise,
Except your sweet voice
Am I in love with you?

I try hard to go away
But you pull me like magnet
Without any words
Am I in love with you?


Sometimes I feel angry,
I had a small world of my ideas
You broke everything,
Left me alone in jungle
I feel scared of wildness
And same time I enjoy vastness
Am I in love with you?

The darkness of the night, no longer fear me
The cloud of sadness, no longer torture me

Whenever I look into your eyes,
They say something silent
Only my heart understands
And I become speechless
Am I in love with you?

Thursday, May 23, 2013

Mother

Mother,
My heart feels grateful to you,

You allowed me to be born.
You supported me when I was delicate.
You protected me when I was ignorant.
You punished me when I made mistakes.
You praised me when I made you proud

Mother,
My heart feels grateful to you,
You did the best, you could do.

Mother,
There was a time,
When I knew, I couldn't exist without you.
When your love and appreciation,
Was only way to live.
When without your encouragement, I couldn't imagine myself.
When you were my strength and purpose of life.

Mother,
My heart feels grateful to you,
But, I am no more a little girl  

I know,
You feel pain seeing me going away from you.

I no more ask you what should I do
I no more need your lap to cry
I no more need your protection and support.

But Mother,
My heart feels grateful to you,
And will be always.

I carry nothing from our bonding except gratefulness.
Whatever happens out of this gratefulness.
I will let it happen.

Thanks Mother for a beautiful life.

When I was writing this poetry, my hands were shaking. Just few years back, I wrote a poetry about my deep attachment with mother and now deep detachment from mother.
In our social structure, either kids have deep love attachment or hatred but detachment is rarely seen so my heart was beating fast as my friends might feel how I could be so indifferent.
But  I do need to accept I grow and change every moment. Nothing can be stagnant when a person start seeking truth beyond all the earthly relationships. Nothing can be stagnant when a person drops all social conditioning and sees only reality.

Tuesday, May 21, 2013

तैयारी


सारा दिन निकल गया
जाने किन-किन झमेलों में
रात हुई तो याद आया,
तुझे तो याद किया ही नहीं !

मिल गया था आज भी ,
बहाना एक नया,
तुझसे दूर रहने का
गुज़ार दिया एक और दिन,
तुझसे नज़रे मिलाये बिना ही !

अब , ना जाने कब अपना मिलन होगा,
जाने कब इन झमेलों और बहानों का,
सिलसिला ख़त्म होगा !

जानती हूँ,
तुम तो तैयार रहते हो हमेशा !
जाने कब मेरी तैयारी पूरी होगी ?

Thursday, April 4, 2013

जिददी मन


मन को किसी न किसी काम में,
उलझे रहने की आदत है !

ज़िन्दगी ख़त्म हो जाती है ,
पर ये काम ख़त्म नहीं होते!

अपनी ज़िन्दगी की उलझने कम हो तो,
कभी पड़ोसी की,कभी देश की,
कभी इस दुनिया की, कभी दूसरी दुनिया!
जो भी हाथ लग जाए,
उसे लेकर परेशान हो जाता है!

पर कभी भी ये जिददी मन,
स्वीकार नहीं करता !
ना कोई उलझन है !
ना कोई परेशानी है !

Mind has a habit,
To remain occupied in some work

Life gets over
But list of work never ends

If problems of own life are less,
Sometimes it takes problems of neighbor,
Sometimes problems of country,
Sometimes problems of earth,
And sometimes problems of heaven!

But never this stubborn mind,
Accepts the truth,
There are no problems !
There is nothing to achieve here!

This poetry is dedicated to my lovely never ending chattering mind:-)

Sunday, February 24, 2013

ज़िन्दगी

ये सब तो चलता रहेगा
कभी ख़ुशी की धूप होगी
कभी दुःख का अँधेरा होगा
इन दोनों के बीच में,
पानी सा इंसान बहता रहेगा !

कभी लगालेगा  कोई  प्यार  से  गले
कभी कोई  नफरत  से  झटक देगा
है नहीं  कोई दुश्मन तुम्हारा यहाँ
पर दोस्तों की गिनती भी कम है
ये दोस्ती-दुश्मनी का सिलसिला,
बनता बिगड़ता रहेगा !

कभी जीत का सेहरा होगा
कभी हार का शिकवा होगा
न जीत का जश्न लम्बा होता है
न हार का दाग गहरा रहता  है
ये कोई नई बात तो नहीं,
जीत-हार का खेल तो,
जब तक  है चलता रहेगा !

तुम चाहों या न चाहों,
इन सबसे  गुज़रना होगा

ये ज़िन्दगी न मेरी है
ये ज़िन्दगी न तेरी  है

ये तो जैसी है बस वैसी है
उसे वैसे ही स्वीकार करना होगा !


.....


अच्छा हुआ जो आपने,
ज़िन्दगी का हिसाब-किताब  समझा दिया !
न रहा कोई खाता खुला,
क्या आपने हिसाब रखना सिखा दिया!

बहुत दिन के बाद,
जब पढ़ी ज़िन्दगी की किताब,
न लगी वो मेरी कहानी ,
क्या आपने पढ़ना सिखा दिया !

भूल कर भी न भूल पाऊँ खुद को,
क्या आपने याद रखना सिखा दिया

Thursday, February 21, 2013

Except You


Sometimes,
When I make silly mistakes
I fear to tell you.
You might come to know
How stupid I am?
but except you,with whom else?
I can share my silliness
And who else can trust in my intelligence,
That I will learn on my own with time

Sometimes,
When I feel like crying on tiny matters
I fear to look at you
you might think
I am not grown up yet 
But except you, with whom else?
I can remain innocent like a child
And who else can accept my tears,
Just as a sign of delicate heart not a weakness

Sometimes,
When I become frustrated and angry on everyone around
I want to run away from you
You might think
I am not a loving girl anymore
But except you,with whom else?
I can show my dark self
And who else can allow me,
To experience every aspect of my being.

Sometimes,
When I feel totally hopeless and disappointed from life,
I don't want to expose myself
You might think 
Even blessings of so many masters didn't bring any light to me
But except you,with whom else I can open unknown knots of my heart
And who else can understand,
Mysterious ways of soul journey

Dedicated to beautiful and lovely people in my life who are always there to accept and love me as I am :-)

Friday, February 15, 2013

क्या मैं भी कभी ?

जब कभी तुम्हें देखती हूँ, 
तो सोचती हूँ  
क्या मैं भी कभी ?
तुम जैसी सरल थी 
भूख लगी तो खा लिया 
नीन्द आई तो सो लिया 
ना फिकर थी बीती बातों की 
ना आने बाला कल सताता था 
दिन भर छोटी-छोटी बातों पर हंसती रहती थी 

जब कभी तुम्हें देखती हूँ, 
तो सोचती हूँ  
क्या मैं भी कभी ? 
प्यार से इतनी भरी थी 
जो भी पास आता था 
उसे मुस्कुराकर गले लगा लेती थी 
कोई पराया नहीं था मेरा, सब अपने थे 
सब पे भरोसा था !

जब कभी तुम्हें देखती हूँ, 
तो सोचती हूँ  
क्या मैं भी कभी ? 
इतनी पाक थी 
जब  सोना, हीरा और मिटटी सब एक थे
जब मुझे बोलना नहीं आता था,
फिर भी आँखों से सब कह जाती थी 

जब कभी तुम्हें देखती हूँ, 
तो सोचती हूँ  
क्या मैं भी कभी ?
तुम जैसी नाज़ुक और नासमझ थी 
जब मुझे कुछ नहीं आता था
न खाना, न बोलना , न चलना 
पूरी तरहे दूसरों पर निर्भर थी 
फिर भी  डर नहीं था अन्दर,
कल कोई न रहा आस पास में तो कैसे करुँगी!

जब कभी तुम्हें देखती हूँ, 
तो सोचती हूँ  
क्या है मेरे पास तुम्हें देने को ?
कुछ भी तो ख़ास नहीं 
पर जो तुम खज़ाना लेकर आए हो,
उसमे से मैंने कुछ हीरें चुरा लिए हैं 
मैं भी अब सकून से तुम्हारी तरह सोती हूँ 
मैं भी अब छोटी छोटी बातों पर हंसती हूँ 
मैं भी अब कभी-कभी तुम्हारी ज़िन्दगी जी लेती हूँ 


This poetry is dedicated to my sister-in-law's son Adrit who is 8 months old. English Translation for my dear friends who don't know how to read hindi :-)


Whenever I see you,
I think, some years back
Was I also simple like you
When I felt hungry, I ate
When I felt sleepy, I slept
There were no regrets of past
There were no worries for future
I kept laughing whole day on silly things

Whenever I see you,
I think, some years back
Was I also filled with love
Whoever came to me,
I smiled and hugged 
Nobody was stranger to me
I trusted everyone

Whenever I see you,
I think, some years back
Was I also so pure
When gold, diamond and soil were all
I didn't know how to speak
Yet eyes said everything 


Whenever I see you,
I think, some years back
Was I also delicate and Goofy
When I did not know anything
Neither eat nor speak, nor walk
I was completely dependent on others
Yet there was no fear?
What if? no one is around tomorrow!

Whenever I see you,
I think
What do I have to give you ?
Not anything special

But you've come with treasure,
I have stolen some diamonds from it
Now I sleep like you do 
Now I laugh on silly things 
Now sometimes I live your life